कारक किसे कहते हैं और कारक कितने प्रकार के होते हैं।

आज के इस आर्टिकल में Hindi Grammar के एक महत्वपूर्ण टॉपिक कारक (Karak) के बारे में बताया गया हैं।

जिसमे आप कारक क्या हैं, कारक के कितने प्रकार होते हैं और सभी प्रकारों का परिभाषा आदि के बारे में जान सकते हैं।

Karak Kise Kahate Hain | Karak Ke Kitne Bhed Hote Hain

Karak kya hai

‘कारक’ का शाब्दिक अर्थ ‘करनेवाला‘ होता है। करनेवाला निश्चित रूप से किसी क्रिया का संपादन करता है। ‘कारक’ का मूल उद्देश्य किसी क्रिया का संपादन करना है, अतः हम कह सकते हैं कि

कारक (Karak) – जो क्रिया की उत्पति में सहायक हो, उसे कारक कहा जाता है।

करनेवाला संज्ञा या सर्वनाम होता है, अतः ‘कारक’ के चिन्ह संज्ञा या सर्वनाम में लगाकर उनका संबंध अन्य शब्दों के साथ सूचित करते हैं। जैसे –

कृष्ण ने पांडवों से कौरवों का नाश करवा दिया।‘ इस वाक्य में ‘कृष्ण ने’ ‘पांडवों से’ और ‘कौरवों का’ संज्ञाओं का रूपांतरण है, जिनके द्वारा इनका संबंध ‘नाश’ करवा दिया’ क्रिया से सूचित होता है।

कारक कितने प्रकार के होते हैं। Karak Kitne Prakar Ke Hote Hain

हिंदी व्याकरण में कारक के आठ भेद होते हैं –

1. कर्ता, 2. कर्म, 3. करण, 4. सम्प्रदान, 5. अपादान, 6. सम्बन्ध, 7. अधिकरण, 8. सम्बोधन


(1.) कर्ता कारक –

किसी वाक्य के काम करनेवाले ‘पद’ को कर्ता कारक कहते हैं।

जैसे – मैंने खाया। राम ने मारा। सीता लिखती है। गायक ने गाया। इन वाक्यों में ‘मैं, राम, सीता, गायक आदि कर्ता कारक हैं।

विशेष – कौन करता है? इस प्रश्न से जो उत्तर मिलता है, उसे कर्ता कहते हैं। कर्ता कारक के चिन्ह ‘ने’ और शून्य (0) हैं।


(2.) कर्म कारक –

जिस पर काम का फल पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं।

जैसे – राम ने रावण को मारा।

इस वाक्य में मारने का फल ‘रावण’ पर पड़ता है। अतः ‘रावण’ कर्म कारक हैं। कर्म कारक के चिन्ह ‘को’ और शून्य ‘0’ हैं।


(3.) करण कारक –

कर्ता जिस साधन, औजार, उपाय या हथियार से काम करता है, उसे करण कारक कहते हैं।

जैसे – राम कलम से लिखता है।

इस वाक्य में ‘कलम’ करण कारक हैं। करण कारक के चिन्ह ‘से, द्वारा’ हैं।


(4.) सम्प्रदान कारक –

कर्ता जिसके लिए क्रिया का सम्पादन करता है, उसे सम्प्रदान कारक कहा जाता है।

जैसे – राम ने धर्म की रक्षा के लिए रावण को मारा।

इस वाक्य में कर्ता ‘धर्म की रक्षा’ के लिए काम करता है, अतः ‘धर्म की रक्षा’ में सम्प्रदान कारक हैं। सम्प्रदान कारक के चिन्ह ‘को’, ‘के लिए’ हैं।


(5.) अपादान कारक –

‘संज्ञा’ या ‘सर्वनाम’ का वह शब्द जिससे किसी वस्तु की ‘जुदाई’ अलगाव होना या अलग होना’ समझा जाय, उसे अपादान कारक कहते हैं।

जैसे – गंगा हिमालय से निकलती है।

इस वाक्य में गंगा हिमालय से ‘अलग’ होती है, अतः ‘हिमालय’ में अपादान कारक हैं। अपादान कारक का चिन्ह ‘से’ हैं। इसके अतिरिक्त भय, रक्षा, तुलना तथा दूरी बोधक में भी अपादान कारक होता है।

जैसे – वह साँप से डरता है। ईश्वर संकट से रक्षा करता है। सीता गीता से लम्बी है। मुंबई पटना से दूर है।


(6.) सम्बन्ध कारक –

जिससे एक शब्द का सम्बन्ध दूसरे से ज्ञात हो, उसे सम्बन्ध कारक कहते हैं।

जैसे – राम का घर यहाँ हैं।

इस वाक्य में राम ‘सम्बन्ध’ घर से बताया गया है, अतः राम में सम्बन्ध कारक है। सम्बन्ध कारक के चिन्ह ‘का, के, की, रा, रे, री’ हैं।


(7.) अधिकरण कारक –

क्रिया जिस स्थान पर हो, उसे अधिकरण कारक कहा जाता हैं।

जैसे – वह खाट पर सोया हैं।

इस वाक्य में सोने काम ‘खाट’ पर हो रहा है, अतः ‘खाट’ अधिकरण कारक हैं। अधिकरण कारक के चिन्ह ‘में, पर’ हैं।


(8.) सम्बोधन –

पुकारने, चिल्लाने या सम्बोधित करने को सम्बोधन कहा जाता है।

जैसे – हे राम ! अरे श्याम !

सम्बोधन के चिन्ह ‘हे’ ‘अरे’ हैं।


विभक्ति किसे कहते हैं। – Vibhakti Kya Hain in Hindi

विभक्ति – ‘कारक’ के अलग-अलग चिन्हों को विभक्ति कहा जाता हैं।

कारक की विभक्तियों के चिन्हों की लिस्ट या सूचि –

1 . कर्ता कारक ने, शून्य (0)
2 . कर्म कारक को, शून्य (0)
3 . करण कारकसे, द्वारा
4 . संप्रदान कारकको, के लिए
5 . अपादान कारकसे
6 . संबंध कारकका, के, की, रा, रे, री
7 . अधिकरण कारकमें, पर
8 . संबोधनहे, अरे, अजी, अहो।

आठों कारकों से युक्त वाक्य :-

हे हरि! राम ने रावण को वन से जाकर लंका में धर्म की रक्षा के लिए बाण से मारा।


कर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग

1 . सामान्यभूत, आसन्नभूत, पूर्णभूत और संदिग्ध भूतकालों की सकर्मक क्रियाओं में कर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग होता है। जैसे – राम ने रोटी खाई। सीता ने भात खाया है। रंजन ने पढ़ा होगा आदि।

2 . जब ‘संयुक्त क्रिया’ के दोनों खंड सकर्मक हो, तो अपूर्ण भूत और हेतुहेतुंदभूत को छोड़कर शेष सभी भूतकालों में कर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग होता है। जैसे – श्याम ने उत्तर बता दिया। मदन ने खाना खा लिया।

3 . साधारणतः ‘अकर्मक’ क्रिया में ‘ने’ चिन्ह नहीं लगता है, पर नहाना, छींकना, खाँसना, थूकना आदि ‘अकर्मक’ क्रियाओं में ‘ने’ चिन्ह लगता है। जैसे – कृष्ण ने छींका। रंजन ने नहाया। बबली ने थूका। मदन ने खाँसा।

4 . जब अकर्मक क्रिया सकर्मक क्रिया बन जाए, तो ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग होता है। जैसे – राम ने टेढ़ी चाल चली। उसने खूब लड़ाई लड़ी।

5 . ‘इच्छाबोधक’ भूतकालिक क्रिया के कर्ता के साथ ‘ने’ चिन्ह आता है। जैसे – मैंने उपदेश सुनना चाहा।

6 . ‘डाल’ या ‘दे’ धातु के पहले अकर्मक क्रिया रहे तो सामान्य, आसन्न और संदिग्ध भूतकाल में कर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग होता है। जैसे – मदन ने अपनी बात कह डाली। उसने रात भर जाग डाला। राजा ने दान दिया है।


कर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग कहा नहीं होता?

1 . अकर्मक क्रियाओं के भूतकाल में कर्ता के ‘ने चिन्ह का प्रयोग नहीं होता है। जैसे – मैं गिर गया। वह दौड़ा।

2 . वर्तमान और भूत काल की क्रियाओं के साथ ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग कभी नहीं होता है। जैसे – मदन आ रहा है। रंजन खाता है। कृष्ण जाएगा।

3 . भूतकालिक क्रिया बकना, बोलना, ले जाना, भूलना, समझना सकर्मक रहने पर भी इसके ‘कर्ता’ के साथ ने चिन्ह का प्रयोग नहीं होता। जैसे – वह गाली बका। मैं बोला। वह बोला आदि।

4 . संयुक्त क्रिया का अंतिम खंड ‘अकर्मक’ भूतकालिक हो, तो उसके साथ ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग नहीं होता है। जैसे – तुम खा चुके। बहू रसोई बना चुकी। श्याम पटना जा चुका।


अभ्यास :

(क) कारक किसे कहते हैं उदाहरण सहित स्पष्ट करें?

(ख) कारक के कितने भेद होते हैं सभी का नाम लिखें।

(ग) कर्ता और कर्म कारक में क्या अंतर है।

(घ) करण और अपादान कारक के ‘से’ चिन्ह के प्रयोग में अंतर स्पष्ट करें।

(च) संप्रदान कारक और कर्म कारक के बीच में अंतर स्पष्ट करें।

(छ) कारक की आठों विभक्तियों से युक्त दो वाक्य बनावे।

(ज) कर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग किन किन परिस्थितियों में होता है।

(झ) कर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग कहाँ नहीं होता है।

Final Thoughts –

आप यह हिंदी व्याकरण के भागों को भी पढ़े –