अव्यय किसे कहते हैं। अव्यय कितने प्रकार के होते हैं।

आज के इस आर्टिकल में हिंदी व्याकरण के एक महत्वपूर्ण टॉपिक अव्यय (Avyay) के बारे में बताया गया है जिसमे आप अव्यय क्या होता है, अव्यय के भेद कितने होते हैं और सभी प्रकार अव्यय के उदाहरण आदि के बारे में पढ़ सकते हैं।

Avyay Kise Kahate Hain | Avyay Kitne Prakar Ke Hote Hain

Avyay kya hai

अव्यय (Avyay) – जिन शब्दों के रूप ‘लिंग’, ‘वचन’ और ‘कारक’ के अनुसार नहीं बदलते हैं, उन्हें ‘अव्यय’ कहा जाता है।

✅ ‘अव्यय’ को ‘अविकारी शब्द’ भी कहा जाता है।

जैसे – राम धीरे-धीरे जाता है। मैं प्रतिदिन पढता हूँ। तुम अवश्य घर जाओगे आदि।

ऊपर दिए गए वाक्यों में धीरे-धीरे, प्रतिदिन और अवश्य ‘अव्यय’ शब्द हैं। इन शब्दों में ‘लिंग’, ‘वचन’ और ‘कारक’ के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता हैं।

अव्यय कितने प्रकार के होते हैं –

हिंदी व्याकरण में अव्यय के 4 भेद होते हैं जो की नीचे लिखे गए हैं –

1 . क्रिया-विशेषण अव्यय

2 . सम्बन्धबोधक अव्यय

3 . समुच्चबोधक अव्यय

4 . विस्मयादिबोधक अव्यय


1 . क्रिया-विशेषण अव्यय –

क्रिया की विशेषता बताने वाले अव्यय शब्द को ‘क्रिया-विशेषण अव्यय’ कहा जाता है।

जैसे –

वह प्रतिदिन पढता है। कुछ खाने को दो। राम धीरे-धीरे गाता है। इन वाक्यों में प्रतिदिन, कुछ और धीरे-धीरे शब्द क्रिया की विशेषता बता रहे हैं, अतः ये शब्द क्रिया-विशेषण हैं।

क्रिया-विशेषण के भेद : मुख्य रूप से क्रिया-विशेषण के पांच भेद है।

1 . कालवाचक, 2 . स्थानवाचक, 3 . परिमाणवाचक, 4 . रीतिवाचक, 5 . प्रश्नवाचक।

1 . कालवाचक क्रिया-विशेषण – जिन शब्दों से ‘क्रिया’ के होने का समय का बोध हो, उसे कालवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं।

जैसे – आज, कल, परसो, अब, जब, कब, तब, तभी, सदा, प्रतिदिन, पश्चात, तभी, जभी, कभी आदि।

2 . स्थानवाचक क्रिया-विशेषण – जिन शब्दों से क्रिया के होने के स्थान का बोध हो, उसे स्थानवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं।

जैसे – यहाँ, वहाँ, जहाँ, कहाँ, अंदर, नीचे, पास, दूर, इधर, उधर, जिधर, चारों ओर, आर-पार आदि।

3 . परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण – जिस शब्द से क्रिया के परिमाण या अधिकता या न्यूनता का पता चले, उसे परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं।

जैसे – ज्यादा, कम आदि।

4 . रीतिवाचक क्रिया-विशेषण – जिस शब्द से क्रिया की रीति का पता चले, उसे रीतिवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं।

जैसे – ऐसे, वैसे, कैसे, ज्यों, त्यों, ठीक, गलत, तेज, धीरे-धीरे, अचानक, शांतिपूर्वक, सुखपूर्वक आदि।

5 . प्रश्नवाचक क्रिया-विशेषण – जिस क्रिया-विशेषण से प्रश्न का बोध हो, उसे प्रश्नवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं।

जैसे – क्यों, क्या, किसलिए, कैसे, किस कारण आदि।


2 . सम्बन्धबोधक अव्यय –

‘सम्बन्धबोधक’ अव्यय ऐसे अविकारी अव्यय शब्दों को कहा जाता हैं, जो ‘संज्ञा’ या ‘सर्वनाम’ के साथ आकर उनका ‘सम्बन्ध’ वाक्य के अन्य शब्दों के साथ बताते हैं।

जैसे –

तुम्हारे बिना हमारा यहाँ कौन हैं ?

घर के अंदर सोये रहना अच्छा नहीं हैं।

इन वाक्यों में ‘बिना’ और ‘अंदर’ सम्बन्धबोधक अव्यय है।

अन्य सम्बन्धबोधक – पास, दूर, नीचे, पहले, बाद, समान, विरुद्ध, कारण, अनुकूल, बिना, के साथ, बाहर, प्रतिकूल, अनुसार, प्रति, लिए, हेतु, सिवा, अतिरिक्त, रहित, योग्य आदि।


3 . समुच्चबोधक अव्यय –

दो शब्दों या वाक्यांशों को जोड़ने या अलग करने वाले अव्यय शब्द को समुच्चबोधक अव्यय कहा जाता हैं।

जोड़ने वाले शब्द संयोजक और अलग करने वाले विभाजक कहे जाते है। और तथा एवं आदि संयोजक है, परन्तु, किन्तु, मगर, क्योंकि, ताकि, की, तो, इसलिए आदि विभाजक शब्द है।

समुच्चयबोधक के दो भेद हैं – (1) समानाधिकरण, (2) व्यधिकरण।

(1) समानाधिकरण – ‘मुख्य वाक्य’ को जोड़ने वाले ‘अव्यय’ को ‘समानाधिकरण’ कहते हैं। जैसे – और, तथा, एवं, अथवा, या, अथ, नहीं तो आदि।

(2) व्यधिकरण – एक वाक्य में जब एक या एक से अधिक ‘आश्रित वाक्य’ अव्यय के द्वारा जोड़े जाते हैं, तो उसे व्यधिकरण कहा जाता है।

जैसे – क्योंकि, जोकि,, ताकि, यधपि, तथापि, किन्तु, परन्तु, लेकिन, इसलिए आदि।


4 . विस्मयादिबोधक अव्यय –

जिन ‘अव्यय’ शब्दों से हर्ष, विषाद, घृणा, आश्चर्य, आदि मन के भावों को प्रकट किया जाता हैं, उन्हें ‘विस्मयादिबोधक अव्यय’ कहा जाता है।

जैसे – आह, हाय, हाय रे, हाय-हाय, छि:छि:, धिक्, अरे, हा, चुप, धत, उफ, वाह आदि।


अभ्यास :

(क) अव्यय किसे कहते हैं? सोदाहरण स्पष्ट करें।

(ख) अवयव के कितने भेद हैं? नाम लिखें।

(ग) क्रिया-विशेषण की परिभाषा दें। क्रिया-विशेषण के भेदों सोदाहरण स्पष्ट करें।

(घ) विस्मयादिबोधक अव्यय किसे कहते हैं? समझाकर लिखें।

(च) समुच्चयबोधक अव्यय को उदाहरण देकर स्पष्ट करें।

Final Thoughts – 

आप यह हिंदी व्याकरण के भागों को भी पढ़े –